इस जमात के संस्थापक मौलाना इलियास को यह देखकर दुख होता था कि दिल्ली के आस-पास के मुसलमानो मे हिन्दु जैसी रंगत थी। वे गोमांस नही खाते थे, चचेरी बहन से शादी नही करते थे, सभी त्योहार मिल जुलकर बनाते थे यहाँ तक की अपने नाम भी हिन्दु जैसे रखते थे। इसी से क्षुब्ध होकर इलियास ने मुसलमानो के अन्दर कट्टरपन्ती की भावना जाग्रत करना तय किया। मौलाना इलियास ने इन सब का कारण हिन्दुओ के मेल-जोल को माना और इसका उपाय इलियास ने मुसलमानो को हिन्दुओ से अलग करना समझा। तब्लीगी मूवमेन्ट के लेखक मौलाना वहीद्दुदीन बताते है कि वह मुस्लिम व्यवहार प्रशिक्षित होकर एक नये मुसलमान बन गये थे मतलब उनकी सोच को बदल कर, उनके दिमाग की धुलाई कर, उनकी मूल जड को उखाड कर हर चीज मे अलग कर दिया था। खासतौर पर भाषा, पोषाक, दाढी, खानपान आदि सब इसके प्रतीक थे। तब्लीगी जमात से प्रशिक्षित मुसलमान अपने स्थानीय मेवातियो मे जाकर यही प्रचार फैलाते जिससे मेवात पूरी तरह बदल गया। और वास्तव मे मुसलमानो को कट्टर मुसलमान बनाना यही तब्लीगी जमात का मिशन हैं। महात्मा गांधी जी द्वारा सन् 1919 मे चलाए गये खिलापत आन्दोलन का लाभ उठाते उन्होने सही मुसलमान और आम मुसलमान के बीच अन्तर को समझाने तथा हिन्दुओ से अलग करने मे आसानी हुई, इन्होने आम मुसलमानो के अन्दर कट्टरपन्ती की भावना भर दी थी। खिलापत आन्दोलन के बाद जमात का काम इतनी तेजी से बढा कि जमाते उलेमा ने सन् 1926 मे बैठक कर तब्लीगी जमात को स्वतंत्र रुप से चलाने का फैसला किया इस तरह तब्लीगी जमात बनी। इलियास के बाद उनके बेटे मौहम्मद यूसुुफ ने पुरे भारत और विदेश की यात्राएं की इस तरह से अन्य देशो से भी तब्लीगी मुसलमान नजामुद्दीन आने लगे और इनका कारोबार बढता गया।
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