तब्लीगी जमात के ऐजेंडे से बेखबर लोग
आज सभी के कानो मे तब्लीगी जमात का नाम पड जाने के बाद भी पूरा देश यहाँ तक की बडे-बडे विद्धवान तब्लीगी जमात के मंसूबो और उद्देश्य से बेखबर हैं। यही कारण हैं कि तब्लीगी (प्रचार) जमात सौ बर्षो से अपने कार्य मे लगा हुआ हैं तथा अपने मंसूबो को अंजाम दे रहा हैं।

                      
क्या हैं तब्लीगी जमात

तब्लीगी जमात एक ऐसा समूह है जिसका मूल उद्देश्य मुसलमान को पक्का मुसलमान बनाना हैं या यूं  कहना कोई गलत नही होगा कि ये शांतिपूर्वक तथा राष्ट्रवादी मुसलमान का नारा लेकर जिहाद का काम कर रहे हैं। तब्लीगी जमात मुसलमानो के बीच हर एक गैर इस्लामी चीज छोडने का प्रचार करती हैंं, खान-पान बोल-चाल पहनावा, मान्याताएं आदि सब कुछ। तब्लीगी जमात राष्ट्र से पहले धर्म को सर्वोपरि बताती हैं अर्थात ये बताते हैं कि राष्ट्र और अन्य समूह के ऊपर इस्लाम की सामूहिकता सर्वोपरि रहनी चाहिए।

कैसे फैलता गया तब्लीगी जमात का कारोबार

इस जमात के संस्थापक मौलाना इलियास को यह देखकर दुख होता था कि दिल्ली के आस-पास के मुसलमानो मे हिन्दु जैसी रंगत थी। वे गोमांस नही खाते थे, चचेरी बहन से शादी नही करते थे, सभी त्योहार मिल जुलकर बनाते थे यहाँ तक की अपने नाम भी हिन्दु जैसे रखते थे। इसी से क्षुब्ध होकर इलियास ने मुसलमानो के अन्दर कट्टरपन्ती की भावना जाग्रत करना तय किया। मौलाना इलियास ने इन सब का कारण हिन्दुओ के मेल-जोल को माना और इसका उपाय इलियास ने मुसलमानो को हिन्दुओ से अलग करना समझा। तब्लीगी मूवमेन्ट के लेखक मौलाना वहीद्दुदीन बताते है कि वह मुस्लिम व्यवहार प्रशिक्षित होकर एक नये मुसलमान बन गये थे मतलब उनकी सोच को बदल कर, उनके दिमाग की धुलाई कर, उनकी मूल जड को उखाड कर हर चीज मे अलग कर दिया था। खासतौर पर भाषा, पोषाक, दाढी, खानपान आदि सब इसके प्रतीक थे। तब्लीगी जमात से प्रशिक्षित मुसलमान अपने स्थानीय मेवातियो मे जाकर यही प्रचार फैलाते जिससे मेवात पूरी तरह बदल गया। और वास्तव मे मुसलमानो को कट्टर मुसलमान बनाना यही तब्लीगी जमात का मिशन हैं। महात्मा गांधी जी द्वारा सन् 1919 मे चलाए गये खिलापत आन्दोलन का लाभ उठाते उन्होने सही मुसलमान और आम मुसलमान के बीच अन्तर को समझाने तथा हिन्दुओ से अलग करने मे आसानी हुई, इन्होने आम मुसलमानो के अन्दर कट्टरपन्ती की भावना भर दी थी। खिलापत आन्दोलन के बाद जमात का काम इतनी तेजी से बढा कि जमाते उलेमा ने सन् 1926 मे बैठक कर तब्लीगी जमात को स्वतंत्र रुप से चलाने का फैसला किया इस तरह तब्लीगी जमात बनी। इलियास के बाद उनके बेटे मौहम्मद यूसुुफ ने पुरे भारत और विदेश की यात्राएं की इस तरह से अन्य देशो से भी तब्लीगी मुसलमान नजामुद्दीन आने लगे और इनका कारोबार बढता गया।

भाजपा कर रही कांग्रेस वाली गलती 

जिस प्रकार कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्रवादी मुसलमान समझकर जिन्हे महिमामंडित किया ये सब कट्टर इस्लामी थे इनका मकसद अपनी ताकत को बढाकर पूरे देश पर कब्जा करने की मंशा थी। तथा पार्टियां ये भी भूल गयी कि 1992-93 मे भारत, पाक, बाग्ंलादेश मे कई मन्दिरो पर हमले मे जमात का नाम सामने उभरा था तथा न्यूयार्क मे आतंकी हमलो के बाद वैश्विक अध्ययनो मे जमात का नाम सामने आया था। अमेरिका के अलावा मोरक्को, फ्रासं फिलीपींस, आदि मे सरकारी एजेंसियों ने जिहादियों ओैर तब्लीगियोें मे गहरे सम्बन्ध पाये लेकिन भाजपा ने भी इन सब बातो पर ध्यान न देते हुए इन्हे राष्ट्रवादी और शांतिपूर्वक धर्म का प्रचार करने वाले मुसलमान समझकर भारत मे तब्लीगी जमात का काम चलने दिया। 



                                                                                     विधान चन्देल



                                                                     

Post a Comment

أحدث أقدم