सुधार की जरूरत

कोरोना के इस संकटकाल में देश का बड़ा समुदाय प्रवासी मजदूर हमारे सामने उभर कर आया है। यह तो सब जानते ही होगे कि ये वे लोग होते हैं जो रोजी-रोटी की तलाश में अपने गांव कस्बों को छोड़कर दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए जाते हैं 
                                   

देखो, किसी भी समस्या का समाधान करने से पहले हमें यह जानना आवश्यक होता है कि यह समस्या उत्पन्न कैसे हुई अर्थात लोगों को दूसरे राज्यों में काम करने की जरूरत क्यों पड़ी। हमारी सरकारों ने यह कभी नहीं सोचा कि लोग गांव घर से हजारों किमी दूर क्यों जाते हैं आइए जानते हैं जब प्रवासी मजदूर स्थानीय स्तर पर रोजगार नहीं खोज पाते हैं चाहे वह उद्योगों में हो या कृषि में या व्यवसायिक रूप में तो इन लोगों को मजबूरी में अपना घर छोड़कर दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ता है।अब सरकार को इस भूल को सुधारना होगा उन्हें यह अनिवार्य करना होगा कि किसी भी व्यवसाय में चाहे वह उद्योगों में हो या कृषि में सबसे पहले स्थानीय प्रतिभाओं को रोजगार देना होगा जिससे स्थानीय स्तर पर लोगों के लिए रोजगार पैदा होगा तथा वे दूसरे स्थानों पर जाने के लिए आकर्षित नहीं होंगे। दूसरी समस्या यह आती है कि जब प्रवासी मजदूरों को वहां रोजगार मिल जाता है तो संकट की इस घड़ी में प्रवासी मजदूरों को जहां पर ये श्रम करते हैं वहां के स्थानीय मजदूरों की तरह पालन-पोषण क्यों नहीं कर पा रहे हैं   


क्योंकि भारत में 90 % श्रम असंगठित क्षेत्र में है और प्रवासी मजदूरों को असंगठित क्षेत्र के हिस्से के रूप में वर्गीकृत किया गया है जिससे इनका कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता तथा इन्हें कोई छुट्टी मिले या ना मिले कितनी मजदूरी दी जाए कोई चिंता नहीं की जाती तथा जिसके चलते यह सरकार द्वारा मजदूरों को दिए जाने वाले लाभ में सम्मिलित नहीं हो पाते हैं जिसके कारण इन्हें अपने घर गांव में वापस लौटना पड़ रहा है इसके समाधान में उस राज्य सरकार को जहां प्रवासी मजदूर काम करते हैं आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत प्रवासी मजदूरों को राष्ट्रीय आपदा के समय 50 फीसद आर्थिक सहायता प्रदान करनी चाहिए तथा गृह राज्यों को भी संकट के इस दौर में उनका भरपूर मदद करनी चाहिए तथा उन्हें अपने गृह राज्य में रोजगार की मदद मिलनी चाहिए जिससे अर्थव्यवस्था के इस बिगड़ते दौर मे उन पर आने वाली समस्याओं का प्रभाव बहुत हद तक कम किया जा सके।

                                                                                     विधान चन्देल

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